पौधारोपण के साथ पौधों की देखभाल और सुरक्षा का भी उठा रहे जिम्मा : हरियाली अमावस्या पर श्रीराम-जानकी वाटिका में युवाओं ने रोपे पौधे, 5 वर्षों से हर रविवार जारी है हरियाली की मुहिम
Rajendra Tantway Thu, Aug 13, 2026
डिण्डौरी। हरियाली अमावस्या के अवसर पर शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम करौंदी स्थित श्रीराम-जानकी वाटिका में युवाओं की टीम ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश दिया। इस दौरान युवाओं ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि युवाओं का यह प्रयास किसी एक दिन या विशेष अवसर तक सीमित नहीं है। टीम द्वारा पिछले 4-5 वर्षों से लगातार प्रत्येक रविवार पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
पौधारोपण से आगे बढ़कर संरक्षण पर जोर
युवाओं का कहना है कि केवल पौधे लगा देना ही पर्यावरण संरक्षण नहीं है। लगाए गए पौधे को सुरक्षित रखना और उसे वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से टीम प्रत्येक रविवार प्रकृति के संरक्षण के लिए समय निकालती है और लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।
युवाओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी निरंतर जिम्मेदारी है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाए, तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र में हरियाली का विस्तार किया जा सकता है।
हर रविवार प्रकृति के नाम
श्रीराम-जानकी वाटिका में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा लगाए गए पौधों की सुरक्षा करने का संकल्प लिया। युवाओं की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बन रही है।
कार्यक्रम में धारा सरस्वती शैक्षणिक एवं समाज उत्थान समिति के सचिव एडवोकेट निर्मल कुमार साहू, भाजपा मंडल मंत्री विजय राजा साहू, पत्रकार भीमशंकर साहू, दिलीप सिंह कुशराम एवं शारदा नामदेव सहित अन्य युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने प्रकृति संरक्षण को जनअभियान बनाने का आह्वान किया। युवाओं की वर्षों से जारी यह मुहिम संदेश दे रही है कि हर रविवार यदि एक पौधा भी प्रकृति को समर्पित किया जाए और उसकी जिम्मेदारी निभाई जाए, तो छोटी-छोटी पहल मिलकर बड़े पर्यावरणीय बदलाव का आधार बन सकती है।
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