सीवर लाइन, मेनहोल और पाइपलाइन निर्माण में तकनीकी अनियमितताएं मिलीं, 7 : अमृत 2.0 के कामों में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, सहायक परियोजना प्रबंधक सहित 9 अधिकारियों को नोटिस
Rajendra Tantway Tue, Aug 18, 2026
डिंडौरी, 18 अगस्त 2026। नगर परिषद डिंडौरी में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित सीवेज परियोजना एवं अन्य निर्माण कार्यों में लापरवाही और तकनीकी अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जांच के दौरान सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
जांच में स्वीकृत डिजाइन के विपरीत सीवर लाइन, मेनहोल एवं पाइपलाइन निर्माण, आवश्यक तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने, गुणवत्ता परीक्षण एवं निरीक्षण में लापरवाही तथा आवश्यक एनओसी के बिना कार्य किए जाने जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं। इन मामलों को शासकीय कार्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
सहायक परियोजना प्रबंधक सहित 9 अधिकारियों को नोटिस
मामले में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के सहायक परियोजना प्रबंधक श्री अभय कुमार जैन सहित कुल 9 संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
नोटिस पाने वालों में श्री शिवराज बघेल, उपयंत्री नगर परिषद डिंडौरी; श्री विहान शुक्ला, उपयंत्री जल संसाधन विभाग डिंडौरी; श्री अमित तिवारी, तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी डिंडौरी; श्री बलीराम भवेदी, पटवारी हल्का नंबर 67; श्री हेमंत उईके, राजस्व निरीक्षक; श्री आरपी मार्को, तत्कालीन तहसीलदार डिंडौरी; श्री एस.के. शर्मा, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग डिंडौरी; श्री बलभद्र धुर्वे, उपयंत्री म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर तथा श्री गोपाल गुप्ता, परियोजना प्रबंधक म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर शामिल हैं।
स्वीकृत डिजाइन से लेकर गुणवत्ता जांच तक सवाल
जांच में परियोजना के कार्यों में स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप निर्माण नहीं किए जाने के साथ ही तकनीकी दस्तावेजों की उपलब्धता, गुणवत्ता परीक्षण और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर भी गंभीर कमियां सामने आई हैं। इसके अलावा आवश्यक एनओसी के बिना कार्य किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
अमृत 2.0 जैसी महत्वपूर्ण योजना के तहत सीवेज एवं अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में सामने आई इन अनियमितताओं ने कार्यों की निगरानी और तकनीकी पर्यवेक्षण की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सात दिन में देना होगा जवाब
कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को 07 दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को नोटिस में उठाए गए बिंदुओं पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
प्रशासन ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में जवाब प्राप्त नहीं होता है अथवा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
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